Koshadhyaksh क्या होता है – Treasurer के कार्य उनकी योग्यता

आज आप इस पोस्ट में जानेंगे की Koshadhyaksh Kya Hota Hai और Koshadhyaksh Ka Karya, कोषाध्यक्ष की योग्यता एवं यदि आप कोसाध्यक्ष बनना चाहते है, तो उससे सबंधित सम्पूर्ण जानकारी आप इस पोस्ट में पढ़ सकते है.

Koshadhyaksh क्या होता है – Treasurer के कार्य उनकी योग्यता

Koshadhyaksh Ka Matlab

koshadhyaksh का मतलब राज – कोष का अध्यक्ष या राजकोष को सबसे बड़ा अधिकारी होता है. कोषाध्यक्ष खजाने का अधिकारी होता है. जो खजाने की देख – रेख करता है. इसे अंग्रेजी भाषा में Treasurer कहते है. कोषाध्यक्ष के अन्दर प्रभावशाली कौशल होता है जो एक अच्छा लीडर तो होता ही है. साथ ही वह यह भी योजना बनाता है की धन का किस तरह व्यय करना है और कहा, कितना, और किस तरह. कोषाध्यक्ष किसी बैंक, सरकारी संस्था, या प्राइवेट संस्था में हो होता है. 

Koshadhyaksh Kya Hota Hai

कोषाध्यक्ष वह व्यक्ति होता है जो सरकार के खजाने की रखबाली करता है उस धनराशी का हिसाब किताब रखता है, कोषाध्यक्ष के पास उस धन को अपने निजी फायदे के लिए इस्तेमाल करने का कोई अधिकार नहीं होता है. कोषाध्यक्ष एक एसा व्यक्ति है जो किसी भी इकाई का वितीय प्रबंधक होता है जिसका काम वितीय प्रबंधक, वित्त निवेश, और वितीय गतिविधियों से सबंधित जोखिम प्रबंधन आदि प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है.

यह सगंठन के द्वारा इस्तेमाल किये गए धन का पूर्वानुमान भी लगाता है. जब किसी भी वितीय संकट की स्थिति होती है उसे स्थिति में यह एक मुख्य भूमिका निभाता है एवं देश को उस वितीय संकट से बचाता है. वह उस संकट के हिसाब से पूर्ण व्यवस्था करता है. और वह यह भी सुनुश्चित करता है, को व्यवसाय सुचारू रूप से चल रहा हो.

Koshadhyaksh Ka Karya

कोषाध्यक्ष का काम निम्नलिखित है जो इस प्रकार है.

  • कोषाध्यक्ष खजाने की रखबाली करता है.
  • कोषाध्यक्ष का मुख्य काम वित्त सको इस तरह से रखना है की जब कभी संकट की स्थिति बने बह उसे स्थिति में उसका सही इस्तेमाल कर सके.
  • कोषाध्यक्ष यह भी सुनिश्चित करता है की वित्त की कोई कमी न हो. उसका यह भी काम होता है की वह यह भी बता सके की भविष्य में कितने व्यय की आवश्यकता होगी.
  • यह समिति की समस्त प्राप्तियो की रसीदों को देना और व्यय की गई राशी के बिल, रसीद, वाउचर आदि को प्राप्त करके उनका हिसाब रखता है.
  • जिस समिति में कोषाध्यक्ष काम करता है उस समिति के धन का हिसाब किताब रखना कोषाध्यक्ष का होता है.
  • कोषाध्यक्ष समिति के अध्यक्ष या कार्यकारिणी के व्यय मांगने पर उन्हें अपनी स्वीकृति देता है.
  • यह समिति का हिसाब रखता है और कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्तुत करता है.
  • यह समिति की धनराषि का पूर्ण हिसाब रखता है.
  • यह बीते वर्ष किये गए आय – व्यय का लेखा तैयार करके उसे समिति द्वारा नियुक्त करता है एवं उसके द्वारा लिखित लेखो को सचिव द्वारा प्रस्तुत किया जाता है.
  • कोषाध्यक्ष प्रति माह आय व्यय का हिसाब रखता है एवं उसे महीने के अंतिम दिन पेश करता है.
  • प्रत्येक महीने केश बुक में कोषाध्यक्ष के अतिरिक्त अध्यक्ष एवं सचिव द्वारा जाँच कर हस्ताक्षर किये जाते है.
Koshadhyaksh Ki Yogyata

कोषाध्यक्ष की योग्यता इस प्रकार है.

  • कोषाध्यक्ष बनने के लिए आवेदक के पास लेखा, वित्त, व्यवसाय इनमे से सबंधित क्षेत्र में डिग्री होना चाहिए.
  • कोषाध्यक्ष में तकनिकी कौशल, व्यावसायिक कौशल, व्यवहार कौशल जैसे गुण होने चाहिए 
  • यह कोर्स करके विधार्थी को विभिन्न वितीय विश्लेषण उपकरणों को समझने में सहायता मिलती है जो व्यावहारिक दुनिया में काम करने और कोषाध्यक्ष के रूप सफल होने में सहायता करते है.
  • इसमें अन्य MS Office Certificate, CPA certificate जैसे अन्य certificate भी शामिल है.
  • कोषाध्यक्ष भारत का नागरिक होना चहिये.
  • कोषाध्यक्ष इमानदार एवं अपने कार्य के प्रति निष्ठावान होना चाहिए.
  • यह जिस भी कंपनी या संस्था में काम करते है वहा वे पूरी कम्पनी में कभी – कभी वितीय नियोजन के रूप में काम करते है.
  • कोषाध्यक्ष बनने के लिए उस व्यक्ति में कुछ दक्षताए होनी चाहिए जैसे निवेश प्रबंधक, तकनिकी लेखांकन, संगठात्मक नेतृत्व और ज्ञान.
कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी  

कोषाध्यक्ष कई तरह के होते है इनकी अलग – अलग फील्ड होती है जो उस संस्था में कितना धन भविष्य में इस्तेमाल होगा, धन की व्यवस्था करना, धन का निवेश करना, धन का संचालन एवं उसे सुचारू रूप से संचालित एवं सुनिश्चित करना, क्रेडिट रेटिंग, एजेंसियों, बैकरो और व्यय लेने और देने बाले व्यापारियों के साथ अच्छे सबंध बनाये रखना, विभिन्न सम्बंधित निकायों में निवेश करना आदि का काम करता है एवं यह पेंशन, पीएफ, जैसी निकायों की भी व्यवस्था करता है. यह संगठन से जुड़े वित्त सबंधित निर्णय लेने में भी सक्षम होते है. कोषाध्यक्ष की वितीय योजना बनाना और उस पर नियंत्रण रखने की जिम्मेदारी भी होती है   

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